उत्तराखंड में नया अध्याय: बॉर्डर एरिया के विकास के लिए पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बैठी धामी कैबिनेट।

उत्तराखंड देहरादून

देहरादून/चंपावत: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन को प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और अनूठी पहल की है। इसी कड़ी में रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी (NHPC) परिसर में मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई चंपावत जिले के इतिहास में यह पहली बार है जब यहाँ प्रदेश की कैबिनेट बैठक आयोजित की गई है।

 

 

मुख्यमंत्री धामी का यह साफ संदेश है कि अब कैबिनेट की बैठकें केवल राजधानी देहरादून तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि राज्य के अलग-अलग जिलों, विशेषकर सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों में भी आयोजित की जाएंगी।

 

 

 

सीमांत क्षेत्रों की समस्याओं और विकास पर मुख्य फोकस

 

इस अनूठी पहल के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों की समस्याओं, वहाँ के विकास की प्राथमिकताओं और छिपी हुई संभावनाओं को करीब से समझना है।

 

• स्थानीय मुद्दे और प्राथमिकताएं: बॉर्डर एरियाज की कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करना।

 

• रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा: कैबिनेट मंत्रियों के अनुसार, इस बैठक से तराई सफारी के जरिए स्थानीय रोजगार बढ़ाने और शारदा कॉरिडोर को एक वर्ल्ड क्लास डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई है।

 

• जनता से सीधा जुड़ाव: पर्वतीय और सीमांत जिलों के विकास पर केंद्रित इस पहल से स्थानीय लोगों में यह सीधा संदेश जा रहा है कि सरकार उनके प्रति बेहद संवेदनशील है।

 

 

मां वाराही के छत्र ‘फर्रा’ के साथ दिखे सभी मंत्रीगण

 

इस ऐतिहासिक बैठक की शुरुआत बेहद सांस्कृतिक और पारंपरिक अंदाज में हुई। बैठक से ठीक पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित मंत्रिमंडल के सभी सहयोगी एक साथ मां वाराही के पावन छत्र के साथ नजर आए। यह छत्र देवीधुरा की विश्व प्रसिद्ध बग्वाल मेला परंपरा में प्रयोग होने वाली पारंपरिक ‘फर्रा/छन्तोली’ (ढाल) है। इस पारंपरिक प्रतीक को प्रदर्शित कर धामी सरकार ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहर के प्रति अपनी गहरी निष्ठा का परिचय दिया।

 

 

रणनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम

 

चंपावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का निर्वाचन क्षेत्र होने के साथ-साथ एक बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिला भी है। ऐसे में नेपाल सीमा पर कैबिनेट बैठक का आयोजन करना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है। इससे पहले उत्तराखंड के मंत्रियों और खुद मुख्यमंत्री का स्वागत यहाँ के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों से किया गया, जिससे स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिला

 

मुख्यमंत्री धामी की यह दूरदर्शी सोच आने वाले समय में उत्तराखंड के आखिरी छोर पर बसे गांवों (वाइब्रेंट विलेजेस) के विकास की दिशा और दशा बदलने में मील का पत्थर साबित होगी