धामी ने *गढ़वाल के विकास को बनाया राजनीति का केंद्र*

उत्तराखंड देहरादून

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने गढ़वाल मंडल के समग्र विकास को अपनी राजनीति के केंद्र बिंदु में रखा है। यह बदलाव न केवल बुनियादी ढांचे के विकास में दिख रहा है, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक नीतियों में भी स्पष्ट है।
यहाँ इस विषय के मुख्य पहलुओं पर एक विश्लेषण दिया गया है:
1. बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: कनेक्टिविटी और पर्यटन
धामी सरकार ने गढ़वाल की भौगोलिक चुनौतियों को विकास के अवसर में बदला है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: यह परियोजना गढ़वाल के पहाड़ों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित कर रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सेना की आवाजाही को मजबूती मिलेगी।

ऑल वेदर रोड: चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए सड़कों का चौड़ीकरण किया गया है, जिससे तीर्थयात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है

2. ‘मंदिर अर्थव्यवस्था’ (Temple Economy) पर जोर
गढ़वाल की पहचान उसके पवित्र मंदिरों से है। धामी सरकार ने इसे राजनीति और अर्थशास्त्र का मुख्य आधार बनाया है:
केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण: प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में धामी सरकार ने केदारनाथ के भव्य पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी है

बद्रीनाथ मास्टर प्लान: बद्रीनाथ धाम को एक ‘स्मार्ट स्पिरिचुअल टाउन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है

मानसखंड की तर्ज पर विकास: हालांकि मानसखंड कुमाऊं में है, लेकिन धामी ने ‘गढ़वाल-कुमाऊं कनेक्टिविटी’ के माध्यम से पूरे राज्य के धार्मिक पर्यटन को एक सूत्र में पिरोया है।

3. पलायन रोकने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’
गढ़वाल के गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए धामी सरकार ने होमस्टे योजना और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा दिया है। स्थानीय उत्पादों (जैसे मंडुआ, झंगोरा) को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग (GI Tag) और मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि पहाड़ों में ही रोजगार के साधन सृजित हों।

4. प्रशासनिक सक्रियता: गैरसैंण और सीमांत गांव
गैरसैंण (भराड़ीसैंण): धामी सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठकें और सत्र आयोजित कर गढ़वाल के दूरस्थ क्षेत्रों की भावनाओं को जोड़ने का प्रयास किया है।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: चीन सीमा से सटे गढ़वाल के सीमांत गांवों (जैसे माणा) को देश का ‘पहला गांव’ घोषित कर वहां विकास की मुख्यधारा पहुंचाई गई है

5. सख्त कानून और सुशासन
राजनीतिक रूप से धामी ने गढ़वाल के युवाओं और महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कड़ा नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे कदम उठाए हैं। गढ़वाल में भू-कानून और मूल निवास की बढ़ती मांग के बीच, धामी सरकार का रुख विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन पर टिका है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल के विकास को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे जमीन पर उतारने का प्रयास किया है। उनकी राजनीति अब ‘सुविधाजनक पर्यटन’ के बजाय ‘स्थायी पहाड़ी विकास’ के इर्द-गिर्द घूम रही है। इससे न केवल भाजपा की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गढ़वाल के दुर्गम क्षेत्रों में भी आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ी है।